ब्लैक ब्यूटी

निकहत ने टाइट जींस पहनी थी जिस पर छोटे आकार का टॉप उसके उभारों को इतना कसे था कि अधिक उत्तेजना से भर सके। मेहरून लिपस्टिक उसके होंठो को और आकर्षक बना रही थी। फ्लैट का दरवाजा मैंने ही खोला था। दरवाजा खोलते ही उसने पूछा –“डॉ. भूषण कहाँ है?” मैंने दूसरे कमरे की ओर […]

Continue Reading

ललन चतुर्वेदी की कविताएं

इरादतन प्रेम उसके बोलने से मात्र ध्वनि संचरित होती हैउसकी आवाज में कोई रंग नहीं होताउसके पैरों की आहट अनजानी सी लगती है उसका देखना सिर्फ देखना हैदृष्टि न तो संबोधित होती है,न आह्वान करती है रेल के डिब्बे सा चलता रहता है पटरी परयह महज इंजन से जुड़ाव का प्रतिफल है उसकी मुस्कान जैसे […]

Continue Reading

अनदेखी दुनिया की यात्रा

गहरे अंतरिक्ष में, जहाँ इंसान की कल्पना भी पहुँचने से डरती है, वहाँ एक ऐसा ग्रह था जो पृथ्वी से बिल्कुल अलग था-“एरियॉन”। यह कोई साधारण ग्रह नहीं था; यहाँ समय उल्टा चलता था। हर सुबह सूरज उगने के बजाय डूबता था, लोग बूढ़े होकर जन्म लेते और शिशु बनकर मृत्यु को प्राप्त करते।इस रहस्यमय […]

Continue Reading

सीमा सिंह की तीन कवितायें

एकालाप 1. स्मृति में होती है बारिश और भीग जाती है देह कोई सपना आँखों से बह निकलता प्रतीक्षा के घने जंगलों में पुकारे जाने के लिए ज़रूरी था किसी आवाज़ का साथ होना कोई न सुने तो अकेलापन और घहरा उठता है ! 2. कानों में गूंजती हैं अभी भी की गई प्रार्थनाएँ जुड़ी […]

Continue Reading

अनिल अनलाहुत की पांच कविताएं

शरद पूर्णिमा के चाँद को देखते  हुए स्नायु मंडल में एक खिंचाव सा उत्पन्न होता है। यह कविता उस तनाव मुक्ति का एक लघु प्रयास भर है। और यह निश्चित है कि इसमें वह समय भी है ,जिसमें मैं हूँ और मेरे जैसे असंख्य लोग हैं, जिनके लिए निकेनार पार्रा की तरह (” पियानो पर […]

Continue Reading

‘चन्द्रगुप्त’ नाटक में आजीवक

जयशंकर प्रसाद ने अपने नाटकों में इतिहास से सम्बंधित अनेक तथ्यों का उपयोग किया है. वे जिस दौर में ऐतिहासिक उपन्यासों की रचना कर रहे थे उस दौर में औपनिवेशिक ढंग से भारतीय इतिहास को समझने-समझाने का क्रम चल रहा था. प्रसाद की विशिष्टता इस मामले में रेखांकित करने योग्य है कि उन्होंने औपनिवेशिक और […]

Continue Reading

पांच कवितायेँ

तुम और कवितायें चट्टान पर जो आज कुछ नम सी लगी मुझे ।तुम अनदेखा करते रहे दो आँखें, जो तुम्हें देखने के लिए निर्निमेष थक गयी थी।मै यकीन ना करती तो क्या करती!यकीन करना हमेशा मुश्किल होता है!तुम मशगूल थे कविता लिखने और मैंतुम्हारें कंधे पर सिर रखकरबहती रही कविताओं के भंवर में,तुम लिखते रहे […]

Continue Reading

‘शी इज़ नॉट एन इन्नोसेंट गर्ल’

थानेदार:  मैडम, बच्ची का रेप हुआ है, 9 साल की बच्ची है, कुम्हार टोला में रहती थी, उसके मम्मी पापा सब मजदूरी करते हैं, वहीं फुटपाथ पर उनकी दुकान है मिट्टी के बर्तनों की. जिस समय ये सब हुआ उसकी आजी घर पर थीं, पर उनको कुछ सुनाई नहीं देता, इसलिये उनके घर रहते हुए […]

Continue Reading

Female labour force participation in India: Why are women not working?

Abstract Female labour force participation (FLFP) in India remains critically low, with only about 30% of women engaged in paid employment, despite their significant potential contribution to the country’s GDP. Several factors, including socio-cultural norms, economic structures, and systemic barriers, limit women’s workforce participation in both rural and urban settings. Recent trends, however, indicate a […]

Continue Reading