संस्मरण

शकुंतला दी– एक संस्मरण

वर्ष 1969, जुलाई के दिन थे। बारिश के बाद के उमस भरे दिन। क्यूंकि स्कूलों/कॉलेजों की गर्मियों की छुट्टियाँ चल रहीं थी, हम सभी भाई-बहन घर पर ही थे- मैं, मेरा…
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कहानी

 टर्निंग पॉइंट

                        बेशक मैं किसी दूसरे स्कूल में अध्यापक था लेकिन फिर भी मुझे प्राचार्य के साथ उस…
विविध

जिगर मुरादाबादी

बात सन 1920 – 21 की रही होगी मेरे दादा( ग्रैंड फ़ादर) मरहूम हर सहाय हितकारी, पेशे से वक़ील, फतेहपुर कचेहरी में…