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कविता

गार्गी मिश्रा की छः कविताएँ

1. धूप बिना दस्तक दिए आती हैउसे मेरा नाम कभी याद नहीं…
आलेख

सह-अस्तित्व : संस्कृति और आलोचना का एक ज़रूरी बीज-शब्द

शब्द बिरादरी वार्षिक सम्मान २०२५-२६ में श्री विनोद…
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केतन यादव की दस कविताएँ

1. अप्रासंगिक मिलना जितना अनिश्चित और अकस्मात…
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जबलपुर वाया जबलपुर

वायलिन कहाँ है आपका प्रेम उस्ताद!और घोड़े की पूँछ के…

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कविता

देवेश पथ सारिया की छः कवितायें

1. फ़िलिस्तीन में विगत कभी अप्रासंगिक नहीं होता वह जो आप देखते हैं तस्वीरों में—मलबा या साबुत…
कविता

रजत रानी मीनू की तीन कवितायेँ

1.वे जानते हैं वे जानते हैंअनजान नहीं हैंया जानना नहीं चाहतेहमारी मानवीय गरिमा के हनन की पीड़ाजब अबोध…
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डॉ. चंद्रिका चौधरी की छः कवितायेँ

1. अस्तित्व जवाँ थीं जब तकबुढ़ी हड्डियाँखिलातीं, जिलातींपरिवार का प्राण बनउसे ज्यादा मजबूत…
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विजय राही की कविताएँ 

चाह—१ मैंने चाहा था कि उसकी आँखों में ख़ुद को देखूँ उसके घर में रहूँ अपना घर समझकर लेकिन…