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कविता

विजय राही की पाँच कविताएँ

1.एक स्त्री का सपना पति को सपने आते हैं कारख़ानों…
समीक्षा (review)

मैं वापस आऊंगा : एक धीमी धुन का करुण उत्थान 

मुद्दतों बाद किसी हिंदी फ़िल्म का इंतज़ार किया वरना…
कथेतर

डायरी अंश                               

राँची दिनांक : 10 अगस्त 2025  आओ, फूल की बातें करें    एक…
कविता

शंकरानंद की सात कविताएं

१.इतना शोर सुनना इच्छा पर निर्भर करता है कोई जरूर…
आलेख

अन्तर्यात्रा का अन्वेषी: निर्मल वर्मा

आधुनिक भारतीय साहित्य में जिन लेखकों ने अनुभव…
संस्मरण

रूम-झूम बदरवा बरसै 

बीतें दिनो की एक शाम थीं। हम चार दोस्त अपनी पसंदीदा…

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कविता

रजत रानी मीनू की तीन कवितायेँ

1.वे जानते हैं वे जानते हैंअनजान नहीं हैंया जानना नहीं चाहतेहमारी मानवीय गरिमा के हनन की पीड़ाजब अबोध…
कविता

डॉ. चंद्रिका चौधरी की छः कवितायेँ

1. अस्तित्व जवाँ थीं जब तकबुढ़ी हड्डियाँखिलातीं, जिलातींपरिवार का प्राण बनउसे ज्यादा मजबूत…
कविता

विजय राही की कविताएँ 

चाह—१  मैंने चाहा था कि  उसकी आँखों में ख़ुद को देखूँ  उसके घर में रहूँ अपना घर समझकर  लेकिन उसने…
कविता

विजय राही की पाँच कविताएँ

1.एक स्त्री का सपना पति को सपने आते हैं कारख़ानों केजिनमें काम किया था उसने तमाम उम्र ससुर के सपने में…