संस्मरण

रूम-झूम बदरवा बरसै 

बीतें दिनो की एक शाम थीं। हम चार दोस्त अपनी पसंदीदा जगहों में से एक किपलिंग बंगला के खंडहर में मिले। यहां मिलने का मतलब ही होता है कि हम अपने-अपने जीवन में…
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आलेखसंस्मरण

जौन एलिया

“जी ही लेना चाहिये था यार, मरते मरते ख़याल आया मुझे” – जौन (जॉन) एलिया गए 8 नवंबर को जौन एलिया की पुण्यतिथि…