1. फ़िलिस्तीन में विगत कभी अप्रासंगिक नहीं होता
वह जो आप देखते हैं तस्वीरों में—
मलबा या साबुत इमारतें
हमेशा ‘बचा हुआ फ़िलिस्तीन’ होता है
वे जो कूदते हैं किसी छुट्टी के दिन
भूमध्य सागर में तैराकी के लिए
हमेशा ‘बचे हुए फ़िलिस्तीनी’ होते हैं
जी भर कर रो चुका है उनमें से हरेक
वे जानते हैं कि
उनमें से कुछ के लिए
यह आख़िरी छुट्टी है
सागर में आख़िरी डुबकी है
वे कई बार डुबकियाँ लगाते हैं
आने वाली छुट्टियों के लिए
जब वे क़ब्र में क़ैद होंगे, बेबस
आप संबोधित नहीं कर सकते
फ़िलिस्तीन को अन्य देशों की तरह,
फ़िलिस्तीनियों को अन्य लोगों की तरह
इतनी टूट-फूट से गुज़रा है
फ़िलिस्तीन का हर मकान और इंसान
कि जो नहीं बच सका—भीतर-बाहर
उसका उल्लेख ज़रूरी बना रहता है
इतना ग़ैर-यक़ीनी मुस्तक़बिल है
अरब के इस घायल परिंदे का
कि विगत कभी अप्रासंगिक नहीं होता।
2.अस्थि फूल
यूँ तो फूल उगे हैं
उस क़ब्र की अगल-बग़ल की क़ब्रों पर भी
पर जो सोई है भीतर उस क़ब्र के
उसी के कारण पहली दफ़ा
अस्थियों को फूल कहा गया होगा।
3.शीर्षक : मेरा देसी दिल
गँवई भाषा को तुच्छ समझना
भर गिलास चाय पीने को
हेय दृष्टि से देखना
सुड़ुक-सुड़ुक की आवाज़
किए बिना चाय पीना
चावल भी छुरी कांटे से खाना
पेट भरने पर डकार न लेना
छींकने के लिए माफ़ी मांगना
टोपी उतारने के क़ायदे याद रखना
विलायती रहन-सहन के ढंग हैं
और हैं ऊँचे भारतीयों के चोंचले
मैं चिट्टी-माँ जाया नहीं हूँ
मैं इतना संभ्रांत नहीं हूँ।
4.झंकृत
गिलहरी की तरह
ठिठकती हो तुम
गर्दन के साथ मोड़ देती हो
पृथ्वी के घूर्णन की दिशा
तुम संसार को
डुगडुगी की तरह बजाती हो
एक क्षण इधर देखती हो
और भाग जाती हो
तुम्हारे पेड़ चढ़ने से
शाख़ पर फलों में अमृत भरता है
तुम्हारे भागते फिरने से
ब्रह्मांड निरंतर विस्तृत होता है
क्षणिक दृष्टिपात से तुम्हारे
मैं ‘इधर’ झंकृत होता हूॅं।
5.पुराना प्रेमी कहता है
एक पन्ना हवा में फड़फड़ा रहा है
उस पर तुम्हारे नए प्रेमी का नाम लिखा है
एक पांडुलिपि बोझ से दबी जा रही है
उसमें हमारे साथ की दास्तान लिखी है।
6.अनन्य प्रेम
वह ऐसा एक प्रेमी है
जो जानता है कि
हर कहानी को लंबी कहानी में
और हर लंबी कहानी को उपन्यास में
बदला नहीं जा सकता
वह सब समझता है—
दुनियादारी, आलम भारी
फिर भी वह ताक में है
केवल एक
बहुत लंबा उपन्यास लिख लेने की।
-देवेश पथ सारिया
परिचय

देवेश पथ सारिया
हिंदी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक हैं
कविता संकलन : नूह की नाव (2022); कहानी संग्रह : स्टिंकी टोफू (2025); कथेतर गद्य : छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी, 2022); अनुवाद : हक़ीक़त के बीच दरार (2021), यातना शिविर में साथिनें (2023)।
पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023)
सम्पादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका (www.golchakkar.org)
ईमेल : deveshpath@gmail.com


