कविता

शंकरानंद की सात कविताएं

१.इतना शोर सुनना इच्छा पर निर्भर करता है कोई जरूरी नहीं कि बोलने की तड़प पत्थर को गला ही दे अब तो इतनी पुकार है कि उसका हिसाब नहीं धूप के कण में जितन…
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कविता

Buried, But Breathing

four poems by Prosenjit Nath Today’s post feature four poems under the title Buried, But Breathing by Prosenjit Nath. He explores the inner landscapes of thought, culture, and identity with clarity and passion in following pieces where personal experiences are…
कविता

        माँ की परछाई

माँ तुम नहीं हो  पर मुझमें ही कहीं हो। मैं गाती गीत स्वर तुम्हारा होता  आँखे मेरी, आँसू तुम्हारे  चाल…
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रक्षाबंधन 

इस बार भी बंधे हैं बहनों के धागे मेरी कलाई में  चमकीले, मोतियों जड़े  लाल लाल रंग के  नाड़ियों में…
कविता

1. कविता

रोज की बंधी-बंधाई दिनचर्या से निकली ऊब नहीं है कविता दिनचर्या एक बेस्वाद च्यूंइगम है जिसे बेतरह…