भूल गएं हैं हम, कवि का फर्ज़अरे! लिखो सच्चाई क्या है हर्ज़
लिखो तुम अबला का विलापमासूमों का दर्द, परिवार का संताप
लिखो तुम भूखों की पीड़ाक्यो करते महलों…
क्या कहते हो कुछ लिख दूं,मैं ललित कलित कविताएं।
चाहो तो चित्रित कर दूं,जीवन की वरुण कथाएं।।
सूना कवि-…
मैं तुमसे बातें करना चाहता हूंजब एकांत में तुम्हे पाता हूंतुम बहुत कुछ मुझे समझा जाती हो,मगर पलकें तक न…
आज फिर से मक्के की रोटी बनाई हैउसके साथ साग तीसी और हरी मिर्च,मां लाई हैतुम खाने आओगी क्या?एक बार फिर…
मनोकामनाएं
मैक्स एरमन
शोर और जल्दबाजी में चलो शांत भाव से,रखो याद कि मौन में संभव है बेपनाह…
औरत, रात, चाँद और कजरौटा!
जिंदगी का कजरौटा!
रखती वो सम्भाल कर,
ऊपर, ताखे पर..
सफ़ेद लुगरी के बित्ते भर के…
यह मैं हूं या शाख पर टिका आखिरी पत्तायह पतझड़ का मौसम या शुष्क हवा जागती सीदेखना है कृशकाया मेरी चीर देग…
1 साथ –
पेड़ में लगा गूलर का फूलजैसे नेनुआ के फूल
किसी छप्पर पर बैठेउजास से भर देते हैं
जैसे दिसंबर…






















