औरत, रात, चाँद और कजरौटा!
जिंदगी का कजरौटा!
रखती वो सम्भाल कर,
ऊपर, ताखे पर..
सफ़ेद लुगरी के बित्ते भर के कपड़े मे लपेट कर!
कजरौटा अब भरने को है..
उम्र के…
यह मैं हूं या शाख पर टिका आखिरी पत्तायह पतझड़ का मौसम या शुष्क हवा जागती सीदेखना है कृशकाया मेरी चीर देग…
1 साथ –
पेड़ में लगा गूलर का फूलजैसे नेनुआ के फूल
किसी छप्पर पर बैठेउजास से भर देते हैं
जैसे दिसंबर…






















