कविता

शीर्षक – तुम आओगी क्या?

आज फिर से मक्के की रोटी बनाई हैउसके साथ साग तीसी और हरी मिर्च,मां लाई हैतुम खाने आओगी क्या?एक बार फिर सेमुझे मेरे वर्तमान सेअतीत में बुलाओगी क्या? ये जो…
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कविता

गले न लगा

मेरे सफेद दामन पर तू दाग न लगा ,मेरा नहीं बन सकता तो तू इल्ज़ाम न लगा । तूने जो कुछ भी कहा मैंने सब सुन लिया…
कविता

आशा जगातीं दो अनुवादित कविताएं भाग -1 मैक्स एरमन की कविता डेसिडराटा का हिंदी अनुवाद मनोकामनाएं

मनोकामनाएं मैक्स एरमन शोर और जल्दबाजी में चलो शांत भाव से,रखो याद कि मौन में संभव है बेपनाह…
कविता

बचपन

बचपन ख़्वाब बुनता था बचपन में कभी जो मैं अब उन ख़्वाबों को याद करता हूँ  न जाने कहाँ खो गया बचपन…