दिल साक्षी है….
तस्वीर उसकीआंखो में बसीकोई मिल्कियत जैसा है,
लफ़्ज़ उसकीकानों में घुलेगुड़ के शरबत जैसा है,
दिल साक्षी हैएहसासों के इसआफरा-तफर…
उसकी हाथों की मेंहदी मेंमेरा नाम नहीं था,उसकी ख़ुशी में दिल खुश था,पर बेचैनी थी आराम नही था।
उसकी आंखों…
वह चली गईं बनवासवह रहीं अकेले शिशु के पासरखती थी वह अपने प्रिय परआंख बंद करके विश्वासबस इतना ही तो किया…
ज़िंदगी जैसे रेलगाड़ी है भाई
एक ही थाली में खाते थे चारों भाईशाम को एक ही तख्त पर करते…
अहंकार
मनुष्य का जीवन तब पलता हैधर्म और अधर्म के मार्ग पर चलता हैजब भी हो भयभीत तो उस ईश्वर को याद करता…
ये भीत हमारी हैऔर इसमेंये टांगी हुईतस्वीर उसकी है
भीत में दरारें हो गई हैतुम भी देखोगेमगर बोलना मतरंग…
पिता
जब - जब गांव गए पिता
अकेला हुआ
जब - जब पिता
साथ रहे
छाती भर दूब उग आयी
पिता को बोतल से पानी पीने नहीं…
दादी भी स्मार्ट हुईं
बदल गया है और जमानाबदल गई हैं दादी भीपहले वाली नहीं है बंदिशमिली उन्हें आजाद…
सुनाई देती है मुझे सर्द रातों में ठंड सेकड़कड़ाते हुए लोगों की आहटें ,और देखता हूँ थरथराते हुएउनके नंगे बदन…
पापा आते
जब दफ़्तर से पापा आतेकितनी सारी चीज़ें लाते
कभी वो लाते काजू बर्फ़ीकभी वो लेकर आयें कुल्फी
देते…
गोडा़य गलद
जैसे दन्त स पसंद नहीं हैलेकिन स से सावन बहुत पसंद हैजैसे मृत्यु शब्द पसंद नहीं हैलेकिन उसक…
बेवजह मत बनाओ उसेक्रांतिकारी और महानरहने दो उसे मनुष्य ही,अपनी कमजोरियों औरसंस्कारों के साथ ,जिसमेंवह…
बहुत अधिक बातें
अधिक लोगों नेअधिक बातें कीयानी बहुत अधिक बातें
नदियों नेबहुत आराम से दूसरी नदी से…
” कहो साइकिल ट्रॉफी पाओ ”
बोलो ऐसी कौन सवारीदिखती भी हो प्यारी- प्यारी
नहीं कभी पेट्रोल वो…
भूल गएं हैं हम, कवि का फर्ज़अरे! लिखो सच्चाई क्या है हर्ज़
लिखो तुम अबला का विलापमासूमों का दर्द, परिवार…
क्या कहते हो कुछ लिख दूं,मैं ललित कलित कविताएं।
चाहो तो चित्रित कर दूं,जीवन की वरुण कथाएं।।
सूना कवि-…
मैं तुमसे बातें करना चाहता हूंजब एकांत में तुम्हे पाता हूंतुम बहुत कुछ मुझे समझा जाती हो,मगर पलकें तक न…
आज फिर से मक्के की रोटी बनाई हैउसके साथ साग तीसी और हरी मिर्च,मां लाई हैतुम खाने आओगी क्या?एक बार फिर…
मनोकामनाएं
मैक्स एरमन
शोर और जल्दबाजी में चलो शांत भाव से,रखो याद कि मौन में संभव है बेपनाह…






















