कविता

गले न लगा

मेरे सफेद दामन पर तू दाग न लगा ,
मेरा नहीं बन सकता तो तू इल्ज़ाम न लगा ।

तूने जो कुछ भी कहा मैंने सब सुन लिया ,
अब अपने कहे पर तू पर्दा न लगा ।

तेरी तौहीन का हिस्सा नहीं बनना मुझे ,
भले ही अब तू मुझे अपने गले न लगा ।

तेरी आदतों से बहुत दूर निकल आया हूँ मैं ,
अब तू मुझे फिर से अपनी आदत न लगा ।

मुझे मेरे हालातों पर छोड़ दे अब ,
मेरी बरबादी की तू दुआ न लगा ।

दीपक कुमार

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