कथेतरविविध

कहानी की दुनिया और निर्मल वर्मा

“निर्मल वर्मा की कहानियों में, कहानी के कहानी होने का जो ‘अपना’ या मौलिक अर्थ खुलता है—वह ‘स्वप्न के यथार्थ’ को खोजने जैसा है। परंतु इसके लिये ज़रूरी है…
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