four poems by Prosenjit Nath
Today’s post feature four poems under the title Buried, But Breathing by Prosenjit Nath. He explores the inner landscapes of thought, culture, and identity with clarity and passion in following pieces where personal experiences are transformed into evocative prose
1. “Echoes That Refuse to Fade”
You walk past me nowAs if silence erased your…
आज न जाने क्यों गजानन माधव मुक्तिबोध की लिखी मेरी अपनी प्रिय कविता बार बार याद आ रही. उन्होंने यह कविता…
1.वे जानते हैं
वे जानते हैंअनजान नहीं हैंया जानना नहीं चाहतेहमारी मानवीय गरिमा के हनन की पीड़ाजब अबोध…
वह लंबा, पतला और कमजोर है। यूं समझो बिल्कुल सीख सलाई-सा। सांवला रंग, सिर पर घने-काले बाल ! ऊंच…
1. छठ के बहाने ही सही वापस लौटता हूँ
छठ के बहाने ही सहीवापस लौटता हूँअपनी पुरानी चौखट पर
चौखटदरवाजे में…
अगली सुबह उसने सोचा था कि सब कुछ भूलकर आगे बढ़ूँगा. अब तक जितने भी इरादे उसने खुद से किए थे, सब निभाए थे.
वर्ष 1969, जुलाई के दिन थे। बारिश के बाद के उमस भरे दिन। क्यूंकि स्कूलों/कॉलेजों की गर्मियों की छुट्टियाँ…
इमारतों और गुंबदों का शहर बाकूआप किसी देश को कैसे जान पाते हैं? मेरे ख्याल से एक देश को जानने के लिए वहां…
1. एक्सप्रेस – वे और पगडंडियाँ
आठ लेन की बेहद चौड़ी सड़क.
फर्राटेदार गुजरती गाड़ियां
साफ़ सुथर…
विश्व मानचित्र पर एशिया महादेश में स्थित भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक,भौगोलिक…
1. असुर समय
जैसे पृथ्वी के भीतर
पृथ्वी नहीं लावा है
चीजों के भीतर
हलचल ऊर्जा की
कि जैसे किसी भी दिशा…
आदमी और औरत फिल्म को दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता तपन सिन्हा द्वारा निर्देशित किया गया थे जिसे…
( जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला!)
जब कभी कोई काम नहीं रहता है तो हम अपनी बुकरैक्स में…
बेशक मैं किसी दूसरे स्कूल में अध्यापक था लेकिन फिर भी मुझे प्राचार्य के साथ उस…
1. मैं न आऊं लौटकर तो
मैं न आऊं लौटकर तो
तुम गाॅंव के जवानों
के पाॅंव की माटी
की टुकड़…
1. अस्तित्व
जवाँ थीं जब तकबुढ़ी हड्डियाँखिलातीं, जिलातींपरिवार का प्राण बनउसे ज्यादा मजबूत…
नेहा ने मेंहदी के कुप्पीनुमा पैकेट के मूंह से पिन खींचा और उसे दबाया, मेंहदी बाहर नहीं निकली| बहुत दिनों…
चाह—१
मैंने चाहा था कि
उसकी आँखों में ख़ुद को देखूँ
उसके घर में रहूँ अपना घर समझकर
लेकिन…
बात सन 1920 – 21 की रही होगी मेरे दादा( ग्रैंड फ़ादर) मरहूम हर सहाय हितकारी, पेशे से वक़ील, फतेहपुर कचेहरी में…
खलील जिब्रान की ‘पैगम्बर’ अंग्रेजी में लिखी 28 गद्य काव्य दंतकथाओं की पुस्तक है। यह 1923 में प्रकाशित हुई…






















