कविता

विनोद शाही की चार कविताएं

1. असुर समय जैसे पृथ्वी के भीतर पृथ्वी नहीं लावा है चीजों के भीतर हलचल ऊर्जा की कि जैसे किसी भी दिशा में क्यों ना चलें यमराज के भैंसे पे सवार मिलते…
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कहानी

 टर्निंग पॉइंट

                        बेशक मैं किसी दूसरे  स्कूल में अध्यापक था लेकिन फिर भी मुझे प्राचार्य के साथ उस…
विविध

जिगर मुरादाबादी

बात सन 1920 – 21 की रही होगी मेरे दादा( ग्रैंड फ़ादर) मरहूम हर सहाय हितकारी, पेशे से वक़ील, फतेहपुर कचेहरी में…