( जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला!)
जब कभी कोई काम नहीं रहता है तो हम अपनी बुकरैक्स में किताबों को निकाल कर दोबारा सिलसिलेवार लगाने में…
बात सन 1920 – 21 की रही होगी मेरे दादा( ग्रैंड फ़ादर) मरहूम हर सहाय हितकारी, पेशे से वक़ील, फतेहपुर कचेहरी में…






















