उभरते सितारेकहानी

किरदार और किराया: एक अंतहीन ऑडिशन

सुबह की चाय और ठंडी ब्रेड के साथ, वह आईने में अपना अक्स नहीं, ‘किरदार’ ढूंढता है। एक सीलन भरे कमरे में, जहाँ धूप भी किराया माँगकर आती है, वहाँ वह…
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कहानी

लावारिस

इकतीस दिसंबर की रात थी। आज मल्टी में भव्य आयोजन था। इसी लिए खाने की तलाश में वह—गोलू—रात दस बजे ही आकर बैठ…