संस्मरण

शकुंतला दी– एक संस्मरण

वर्ष 1969, जुलाई के दिन थे। बारिश के बाद के उमस भरे दिन। क्यूंकि स्कूलों/कॉलेजों की गर्मियों की छुट्टियाँ चल रहीं थी, हम सभी भाई-बहन घर पर ही थे- मैं, मेरा…
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आलेखसंस्मरण

जौन एलिया

“जी ही लेना चाहिये था यार, मरते मरते ख़याल आया मुझे” – जौन (जॉन) एलिया गए 8 नवंबर को जौन एलिया क…