विमर्श

छाते जा रहे हैं सल्तनत पर घने साये स्याह

आज न जाने क्यों गजानन माधव मुक्तिबोध की लिखी मेरी अपनी प्रिय कविता बार बार याद आ रही. उन्होंने यह कविता स्वतंत्र भारत के सबसे लाड़ले और लोकप्रिय…
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