वर्ष 1969, जुलाई के दिन थे। बारिश के बाद के उमस भरे दिन। क्यूंकि स्कूलों/कॉलेजों की गर्मियों की छुट्टियाँ चल रहीं थी, हम सभी भाई-बहन घर पर ही थे- मैं, मेरा छोटा…
मेरे पिता आज से लगभग 45 वर्ष पूर्व, बुधवार, 9 जुलाई 1980 को इस दुनिया को, हम सब को छोड़ कर चले गए। कभी-कभी मन में ये…
प्रजातंत्र के इस दौर में जबकि तानाशाही अपने पूरे शबाब पर है, तो भी सियासतदां जानता है कि उसे यह निरंतर…
सत्ता और साहित्य के मध्य सम्बन्ध पर बात करने से पूर्व थोड़ी सी बात सत्ता पर कर लेना ठीक रहेगा। सत्ता के…






















