1. छठ के बहाने ही सही वापस लौटता हूँ
छठ के बहाने ही सहीवापस लौटता हूँअपनी पुरानी चौखट पर
चौखटदरवाजे में नहीं लगी होतीदरवाजाचौखट में लगा होता हैऔरकभ…
1. असुर समय
जैसे पृथ्वी के भीतर
पृथ्वी नहीं लावा है
चीजों के भीतर
हलचल ऊर्जा की
कि जैसे किसी भी दिशा…
1. मैं न आऊं लौटकर तो
मैं न आऊं लौटकर तो
तुम गाॅंव के जवानों
के पाॅंव की माटी
की टुकड़…
माँ तुम नहीं हो
पर मुझमें ही कहीं हो।
मैं गाती गीत
स्वर तुम्हारा होता
आँखे मेरी, आँसू…
चाह—१
मैंने चाहा था कि
उसकी आँखों में ख़ुद को देखूँ
उसके घर में रहूँ अपना घर समझकर
लेकिन…
इरादतन प्रेम
उसके बोलने से मात्र ध्वनि संचरित होती हैउसकी आवाज में कोई रंग नहीं होताउसके पैरों की आहट…






















