कविता

शैलेश कुमार की 4 कवितायेँ

1. छठ के बहाने ही सही वापस लौटता हूँ छठ के बहाने ही सहीवापस लौटता हूँअपनी पुरानी चौखट पर चौखटदरवाजे में नहीं लगी होतीदरवाजाचौखट में लगा होता हैऔरकभ…
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रक्षाबंधन 

इस बार भी बंधे हैं बहनों के धागे मेरी कलाई में चमकीले, मोतियों जड़े लाल लाल रंग के नाड़ियों में…