कविता

केतन यादव की दस कविताएँ

1. अप्रासंगिक मिलना जितना अनिश्चित और अकस्मात रहा उतना ही नियोजित था मानो अपरिचित होना एक उदास शाम और बेचैन रात के बिल्कुल बीच कभी न कभी खाली होना ह…
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कविता

जबलपुर वाया जबलपुर

वायलिन कहाँ है आपका प्रेम उस्ताद!और घोड़े की पूँछ के बालों से बना उसका वह धनुषऔर वह माइक भी जो आपके कंठ से…
Allकविता

रक्षाबंधन 

इस बार भी बंधे हैं बहनों के धागे मेरी कलाई में चमकीले, मोतियों जड़े लाल लाल रंग के नाड़ियों में…