कविता

देवेश पथ सारिया की छः कवितायें

1. फ़िलिस्तीन में विगत कभी अप्रासंगिक नहीं होता  वह जो आप देखते हैं तस्वीरों में— मलबा या साबुत इमारतेंहमेशा ‘बचा हुआ फ़िलिस्तीन’ होता है वे जो कूदते…
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कविता

        माँ की परछाई

माँ तुम नहीं हो  पर मुझमें ही कहीं हो। मैं गाती गीत स्वर तुम्हारा होता  आँखे मेरी, आँसू तुम्हारे  चाल…
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रक्षाबंधन 

इस बार भी बंधे हैं बहनों के धागे मेरी कलाई में  चमकीले, मोतियों जड़े  लाल लाल रंग के  नाड़ियों में…