विमर्श

छाते जा रहे हैं सल्तनत पर घने साये स्याह

आज न जाने क्यों गजानन माधव मुक्तिबोध की लिखी मेरी अपनी प्रिय कविता बार बार याद आ रही. उन्होंने यह कविता स्वतंत्र भारत के सबसे लाड़ले और लोकप्रिय…
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कहानी

 टर्निंग पॉइंट

                        बेशक मैं किसी दूसरे स्कूल में अध्यापक था लेकिन फिर भी मुझे प्राचार्य के साथ उस…
विविध

जिगर मुरादाबादी

बात सन 1920 – 21 की रही होगी मेरे दादा( ग्रैंड फ़ादर) मरहूम हर सहाय हितकारी, पेशे से वक़ील, फतेहपुर कचेहरी में…