बीतें दिनो की एक शाम थीं। हम चार दोस्त अपनी पसंदीदा जगहों में से एक किपलिंग बंगला के खंडहर में मिले। यहां मिलने का मतलब ही होता है कि हम अपने-अपने जीवन में…
सांय-सांय करती हवा…. फड़फड़ करता पांडाल और सरकस के अन्तिम शो का अन्तिम सीन… (शायद नहीं… यह तो शुरुआत थी)…
Today’s post feature a movie review under the title The Red Virgin: When Ideology Becomes More Important Than Humanity-by Prosenjit Nath. A disturbing and emotionally powerful story about political obsession, parental control, and the destruction of individuality
The…
four poems by Prosenjit Nath
Today’s post feature four poems under the title Buried, But Breathing by Prosenjit Nath. He explores the inner landscapes of thought, culture, and identity with clarity and passion in following pieces where personal experiences are…
आज न जाने क्यों गजानन माधव मुक्तिबोध की लिखी मेरी अपनी प्रिय कविता बार बार याद आ रही. उन्होंने यह कविता…
1.वे जानते हैं
वे जानते हैंअनजान नहीं हैंया जानना नहीं चाहतेहमारी मानवीय गरिमा के हनन की पीड़ाजब अबोध…
वह लंबा, पतला और कमजोर है। यूं समझो बिल्कुल सीख सलाई-सा। सांवला रंग, सिर पर घने-काले बाल ! ऊंची उठी नाक…
1. छठ के बहाने ही सही वापस लौटता हूँ
छठ के बहाने ही सहीवापस लौटता हूँअपनी पुरानी चौखट पर
चौखटदरवाजे में…
अगली सुबह उसने सोचा था कि सब कुछ भूलकर आगे बढ़ूँगा. अब तक जितने भी इरादे उसने खुद से किए थे, सब निभाए थे.
वर्ष 1969, जुलाई के दिन थे। बारिश के बाद के उमस भरे दिन। क्यूंकि स्कूलों/कॉलेजों की गर्मियों की छुट्टियाँ…
इमारतों और गुंबदों का शहर बाकूआप किसी देश को कैसे जान पाते हैं? मेरे ख्याल से एक देश को जानने के लिए वहां…
1. एक्सप्रेस – वे और पगडंडियाँ
आठ लेन की बेहद चौड़ी सड़क.
फर्राटेदार गुजरती गाड़ियां
साफ़ सुथर…
विश्व मानचित्र पर एशिया महादेश में स्थित भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक,भौगोलिक व…
1. असुर समय
जैसे पृथ्वी के भीतर
पृथ्वी नहीं लावा है
चीजों के भीतर
हलचल ऊर्जा की
कि जैसे किसी भी दिशा…
आदमी और औरत फिल्म को दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता तपन सिन्हा द्वारा निर्देशित किया गया थे जिसे…
( जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला!)
जब कभी कोई काम नहीं रहता है तो हम अपनी बुकरैक्स में…
बेशक मैं किसी दूसरे स्कूल में अध्यापक था लेकिन फिर भी मुझे प्राचार्य के साथ उस…
1. मैं न आऊं लौटकर तो
मैं न आऊं लौटकर तो
तुम गाॅंव के जवानों
के पाॅंव की माटी
की टुकड़ी अपनी
चोखट…
1. अस्तित्व
जवाँ थीं जब तकबुढ़ी हड्डियाँखिलातीं, जिलातींपरिवार का प्राण बनउसे ज्यादा मजबूत…






















