1.वे जानते हैं
वे जानते हैंअनजान नहीं हैंया जानना नहीं चाहतेहमारी मानवीय गरिमा के हनन की पीड़ाजब अबोध बच्चे इन्द्रजीत मेघवाल कोपीटा जाता हैअछूत जाति…
1. छठ के बहाने ही सही वापस लौटता हूँ
छठ के बहाने ही सहीवापस लौटता हूँअपनी पुरानी चौखट पर
चौखटदरवाजे में…
1. एक्सप्रेस – वे और पगडंडियाँ
आठ लेन की बेहद चौड़ी सड़क.
फर्राटेदार गुजरती गाड़ियां
साफ़ सुथर…
1. असुर समय
जैसे पृथ्वी के भीतर
पृथ्वी नहीं लावा है
चीजों के भीतर
हलचल ऊर्जा की
कि जैसे किसी भी दिशा…
1. मैं न आऊं लौटकर तो
मैं न आऊं लौटकर तो
तुम गाॅंव के जवानों
के पाॅंव की माटी
की टुकड़…
बचे रहो प्रेमसहसा एक फूल गिराफिर कई रंग गिरे डाल सेनए रंग उगेआसमानसफेद बादलों से घिरानन्हीं चिड़िया…
समय का पैर घिसता जाता है
स्थिरता मिटती गई
अस्थिरता का घर,
महल बनता गया
चाहा जीवन से केवल संयम
जीवन ने…
1. अस्तित्व
जवाँ थीं जब तकबुढ़ी हड्डियाँखिलातीं, जिलातींपरिवार का प्राण बनउसे ज्यादा मजबूत…
माँ तुम नहीं हो
पर मुझमें ही कहीं हो।
मैं गाती गीत
स्वर तुम्हारा होता
आँखे मेरी, आँसू…
१.इंतजार का आलाप
अक्सर इंतजार की ऊब
बहुत लंबी होती है
रास्ते वही होते हैं
लेकिन आने की पदचाप…
चाह—१
मैंने चाहा था कि
उसकी आँखों में ख़ुद को देखूँ
उसके घर में रहूँ अपना घर समझकर
लेकिन…
1. ‘इस धारा में’
तुम पर्वत की तरह कोमल थे
नदी तुम्हारे भीतर से बह गई
मैं रेत की तरह कठोर था
मैंने उसे…
इरादतन प्रेम
उसके बोलने से मात्र ध्वनि संचरित होती हैउसकी आवाज में कोई रंग नहीं होताउसके पैरों की आहट…
गहरे अंतरिक्ष में, जहाँ इंसान की कल्पना भी पहुँचने से डरती है, वहाँ एक ऐसा ग्रह था जो पृथ्वी से बिल्कुल अलग…
एकालाप
1.
स्मृति में होती है बारिश
और भीग जाती है देह
कोई सपना आँखों से बह निकलता
प्रतीक्षा के घने…
शरद पूर्णिमा के चाँद को देखते हुए स्नायु मंडल में एक खिंचाव सा उत्पन्न होता है। यह कविता उस तनाव मुक्ति…
तुम और कवितायें
चट्टान पर जो आज कुछ नम सी लगी मुझे ।तुम अनदेखा करते रहे दो आँखें, जो तुम्हें देखने के लिए…
दिल साक्षी है….
तस्वीर उसकीआंखो में बसीकोई मिल्कियत जैसा है,
लफ़्ज़ उसकीकानों में घुलेगुड़ के शरबत…






















